एक लेट फ़्लाइट, होटल का बार, और एक नज़र जो ज़रूरत से ज़्यादा देर तक टिकी रही। कुछ रातें राज़ ही रहनी चाहिए।
दस साल की तमीज़दार दावतें। एक रात की सच्चाई।
तीन मंगलवार वे एक ही छज्जे के नीचे मिले। चौथी बार, किसी ने छतरी नहीं खोली।
एक ख़त जो उसे कभी भेजना नहीं चाहिए था।
बारह साल की शादी, और उसके पास अब भी एक राज़ बाक़ी था।
चेहरे पर नक़ाब। नाम भूल जाइए। नियम? कोई नहीं।
"चाहत एक कहानी है जो हम अँधेरे में सुनाते हैं, एक-एक फुसफुसाता पन्ना।"हर रात एक नई कहानी